Monday, July 14, 2008

आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं इक ऐसे गगन के तले

Daddy may not be a perfect singer, but he loves singing this for me. I enjoy it till I dose off to sleep :)

आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं
इक ऐसे गगन के तले
जहाँ ग़म भी न हो, आँसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले)-२
इक ऐसे गगन के तले

सूरज की पहली किरण से, आशा का सवेरा जागे
चंदा की किरण से धुल कर, घनघोर अंधेरा भागे
कभी धूप खिले, कभी छाँव मिले
लम्बी सी डगर न खले
जहाँ ग़म भी न हो, आँसू भी न हो ......

जहाँ दूर नज़र दौड़ आए, आज़ाद गगन लहराए
जहाँ रंग बिरंगे पंछी, आशा का संदेसा लाएं)
सपनो मे पली हँसती हो कली
जहाँ शाम सुहानी ढले
जहाँ ग़म भी न हो, आँसू भी न हो ....

सपनों के ऐसे जहाँ में जहाँ प्यार ही प्यार खिला हो
हम जाके वहाँ खो जाएँ, शिकवा ना कोई गिला हो
कहीं बैर न हो, कोई ग़ैर न हो
सब मिलके यूँ चलते चलें
जहाँ ग़म भी न हो, आँसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
आ चल के तुझे मैं ले के चलूं ......

2 comments:

Anonymous said...

Hey Vanu, do you know how lucky you are to have such loving parents?
May your life be filled with melody, and many such songs sung by Daddy!!

Vanu said...

Thanks Puja. As far as melody is concerned, Diya is more blessed than me, Daddy still recalls 'Akhiyon ke jarokhon se' since his college days :P